यही है गूंगे का गुड

मन मे अनवरत विचार चलते ही रहते है !
और इन्ही विचारोंका चलना ही सन्सार है !

अगर विचार का चलना बन्द हो जाये तो
हम सन्सार से कट जाते हैं !

और थोडी देर के लिये ही सही,
पर जितना आनन्द इस अवस्था में आता है,
उतना दुसरी मे नही !

और इसके लिये किसी विशेष प्रयत्न की आवश्यकता नही है !

भगवान बुद्ध की एक साधारण सी विधी है !
अपनी आती जाती सांस को देखो !

बस देखते देखते ही वो अवस्था आ जायेगी परम आनन्द की !
पर अगर आप देख पाये तो !

बहुत साधारण सी बात दिखती है !
पर उतनी साधारण है नही !



खैर मेरा अभिप्राय सिर्फ़ इतना है कि इससे इतनी मानसिक और शारारिक स्फ़ुर्ति मिलती है कि जिस भी किसी को इसकी एक बार आदत लग गई , वो बस इसी का हो कर रह गया ! समय और स्थान की कोई पाबन्दी नही है !

जब भी जहां भी आपकी इच्छा हो जाये , आप इसका आनन्द उठा सकते हैं ! और समय बीतने के साथ क्या कुछ घट चुका होगा ? यह सिर्फ़ आप समय बीतने के साथ साथ महसूस करते जायेन्गे !

यह है सही मे गुन्गे का गुड !

कभी इच्छा हो या परेशानी महसूस करें तो अवश्य करें ! आपको आनन्द आयेगा और वैसे ही आदत बना ले तो क्या कहने ?

मग्गाबाबा का प्रणाम.

7 comments:

  अल्पना वर्मा

18 June 2009 13:22

बहुत अच्छा ब्लॉग है यह.
अच्छे वचन पढने को मिले.
पोस्टके शीर्षक में गुड की वर्तनी जांच लिजीए--'गुश 'दिखाई दे रही है.
धन्यवाद.

  Kajal Kumar

18 June 2009 22:18

विचार शून्य होना कहाँ इतना सहज है....सप्रयास विचार शून्य होना ही तो मन पर जीत है.

  राज भाटिय़ा

19 June 2009 15:39

बाबा ताऊ जी आप की बात तो बहुत अच्छी लगी, लेकिन आज कल आप के ब्लांग का फ़ीड नही आ रहा कया बात है ?

मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे

  KK Yadav

20 June 2009 12:33

Bahut sundar bat batayi apne...achha laga !!
___________________________________
अपने प्रिय "समोसा" के 1000 साल पूरे होने पर मेरी पोस्ट का भी आनंद "शब्द सृजन की ओर " पर उठायें.

  डाकिया बाबू

21 June 2009 21:32

बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति....सुन्दर रचना ...बधाई !!
कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधारें !!

  अभिषेक ओझा

22 June 2009 23:41

जय हो बाबा ! कहाँ गायब रहते हैं?

  KK Yadav

26 June 2009 18:16

आपका ब्लॉग नित नई पोस्ट/ रचनाओं से सुवासित हो रहा है ..बधाई !!
__________________________________
आयें मेरे "शब्द सृजन की ओर" भी और कुछ कहें भी....

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