कुछ जवाब पुराने मित्रों को

प्रिय मित्रों, मैं आपको बता दूं कि ये ब्लाग पहले सार्व जनिक नही
था ! और कुछ मित्र आपस मे ही यहां पर गप शप किया करते थे !
कहने को तो हम इसको अध्यातम चर्चा कहते थे पर मैं आपको
बताऊं कि इस नाम की कोई चर्चा नही होती ! आध्यात्म इतना सस्ता
या दो कोडी का नही है कि आप और हम उसके साथ व्यभिचार कर सके !
आध्यात्म या धर्म हर व्यक्ति का सबसे निजी मामला होता है ! इसकी चर्चा
करना तो दूर , आप इसे अपनी बीबी बच्चों से भी नही बांट सकते ! सीधे
शब्दों मे कहूं तो परमात्मा इतना सस्ता भी नही है कि आपकी इन ऊलजलूल
चर्चाओं के चक्कर मे आकर आपका गुलाम ब जायें !


आध्यात्म या धर्म की चर्चा के नाम पर जो कुछ होता है ! उससे भी
सभी वाकिफ़ हैं ! वहां जो कुछ होता है उसकी वजह से ही लोग
धर्म से विमुख होते चले गये ! उन मन्चो पर आज तक जो कुछ हुआ है!
वो बडा शर्म नाक हुआ है ! पहले बातें उजागर नही होती थी पर
आज मिडीया इतना सुलभ और सस्ता है कि हर जगह की पोल पट्टी
सबके सामने खुल जाती है ! खैर हमारा ये विषय कम से कम इस स्थान
पर तो नही ही है !


यहां आप सोच रहे होंगे कि आज ऐसी बातें क्यो हो रही हैं ? तो मैं
आपको बतादुं कि कुछ पुराने मित्रों के फ़ोन आये थे ! और इस ब्लाग
को सार्वजनिक करने की वजह से उनको पीडा पहुंची है ! ऐसा मुझे लगता
है ! मैं उन सभी मित्रों से निवेदन करना चाहुंगा कि मेरी किसी को
कोई ठेस पहुंचाने की इच्छा न तो पहले थी और ना अभी है ! अगर
आपको कुछ गलत लग रहा हो तो स्वयम आत्म विवेचना करे ! आपको
उत्तर स्वत: ही मिल जायेंगे ! और अगर आप इस चीज को अपना
विशेषाधिकार समझ रहे हों तो आप भयन्कर भूल कर रहे हैं !


मैं यहां कुछ बाते सपष्ट कर देना चाहता हुं कि मुझे सभी से एक जैसा
ही स्नेह है ! मेरी तरफ़ से कोई कमी नही है , अगर कमी है तो किसी
की समझ मे होगी ! और समझ सबकी अपनी अपनी होती है ! कोई भी
किसी की समझ को बदल नही सकता ! और एक बात सपष्ट कर दुं कि
अब से बाबा किसी की भी बात का व्यक्तिगत इ-मेल से जबाव नही
दे पायेंगे ! अन्यथा ना ले ! जो भी सवाल जबाव का आदान प्रदान
होगा वो सार्व जनिक रुप से होगा ! त्वरित उत्तर की अपेक्षा ना रखें !
सार्वजनिक रुप से जैसे जैसे नम्बर आयेगा ! उसी अनुक्रम मे उत्तर
दिये जायेंगे !


कुछ मित्रों की ये भी सलाह आई है कि इसे सार्वजनिक ब्लाग रहते
हुये ही सामुदायिक ब्लाग का दरजा दे दिया जाये ! सो ये एक प्रयोग
ही होगा ! इसका कोई अनुभव अभी नही है ! अगर किसी भाई के पास
इस का कोई अनुभव हो तो अवश्य सुझाव देवें ! इस पर सोचा जा सकता है !
पर अभी मुझको ये समझ नही आ रहा है !


पुन: मैं आप सबसे निवेदन करुन्गा कि आप मान अपमान के चक्करों मे ना पडे
और विशुद्ध रुप से जो परम तत्व है ! उसको देखे और वो इतना सस्ता
नही है कि आप के या मेरे समझ आ जायेगा ! मेरी धर्म की अपनी
समझ है और आपकी अपनी है ! और ना मैं किसी पर कुछ थोपा जाना पसन्द
करता हूं और ना अपने उपर किसी को थोपने देना चाहुंगा !


जीवन मे परम आनन्द ही आनन्द है अगर हम लेना चाहे ! परमात्मा ने
किसी को रोका नही है आनन्द लेने से ! पर ये तो कर्म हमारे ही फ़ूटे हैं !
जो हम आनन्द नही ले पाते ! किसने रोका है आपको आनन्द लेने से ?
आप स्वयम ही स्वयम के दुशमन हैं ! स्वयम से दुश्मनी छोड दो
परमात्मा का आनन्द बरसने लगेगा ! भाई जिन्दगी को अखाडा मत बनावो !
ये जीवन बहुत सुन्दर है ! मुझे तो जीवन मे सुन्दरता के अलावा और
कुछ दिखाई हि नही देता ! पता नही आप क्यूं परेशान हैं ?
उत्तर कोई बाबा के पास नही मिलेगा ! सिर्फ़ आपका अन्त:करण ही इसका
जबाव देगा ! और आप ये सोचते हैं कि किसी बाबा की शरण मे जाने से आप
सुखी और शान्त हो जायेन्गे तो ये आपकी परम भूल होगी ! मेरा निवेदन है कि
अगर बुखार आपको चढा है तो दवाई आप खावोगे तो बुखार उतरेगा !
बाबा के खाने से आपका बुखार थोडी उतर जायेगा ! इससे अच्छा है आप
अपना कीमती समय खराब ना करें !


आज का अन्तिम सवाल भाई भाटिया जी का ले लेते हैं ! कायदे से ब्लाग
शुरु होने पर पहला सवाल उनका ही था कि इस ब्लाग को नारद पर
क्युं नही रजिस्टर करवाते ? मित्र भाटिया जी अगर आपने यह सब रामायण
पढ ली होगी तो आपके सवाल का जवाब आपको स्वत: ही मिल गया
होगा ! वैसे हमारा किसी का भी उदेश्य यहां किसी प्रकार से प्रशिद्धी
पाने या प्रचार पाने से कभी नही रहा और अब भी हमारी कोशीश
यही रहेगी कि प्रचार से दूर सब अपने निजि शान्ति के क्षणों को
यहां एक दुसरे से बांट सके ! और मेरी समझ से तो यहां सभी
जानना ही चाहते हैं ! यहां कोई सम्पुर्ण नही है ! तो इसे अखाडा ना बना
कर एक शान्त माहोल मे ही चलने देना चाहिये ! जब भी किसी भाई का
मन शांत नही हो वो यहां आकर शान्ति अनुभव कर सके ! जीवन मे सतत

आनंद की बरसात हो रही है ! उससे वंचित हैं तो दोष आपका हो सकता है , किसी दुसरे

का नही !
मग्गा बाबा के प्रणाम !

3 comments:

  Udan Tashtari

5 August 2008 at 04:15

सही है..शांतिपूर्वक प्रणाम!!!

  P. C. Rampuria

5 August 2008 at 14:19

This comment has been removed by the author.
  hari

5 August 2008 at 14:21

मैं आपकी बात से सहमत हूँ ! सब शान्ति
की तलाश में भटकते हैं ! पर बाबा इन लोगो के
पेट ज्यादा मोटे हो गए हैं ! बाबा आप नाराज
मत होना मैं इन की तरफ़ से माफी चाहता
हूँ ! भाई कमल से क्षमा याचना सहित !

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